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व्याप्ति इस सामाजिक सुरक्षा के विकास में नियोजकों की भूमिका इसकी सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है चाहे वह कार्यान्वयन हो, व्याप्ति का विस्तार हो, नियोजकों का पंजीकरण हो, अंशदान का समय पर भुगतान हो या िफर हितलाभ के सरल एवं स्थिर प्रवाह के लिए प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन हो । नियोजकों की सक्रिय भागीदारी को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
19 अप्रैल को क रा बी अधिनियम 1948 कर्मचारियों को बीमारी, प्रसूति तथा रोजगार चोट की स्थिति में कुछ निश्चित हितलाभ प्रदान करता है तथा उनसे संबंधित अन्य मामलों में भी निश्चित प्रावधान है। यह आशा की जाती है कि यह जानकारी क रा बी अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन नियोजकों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शन सिद्ध होगी। |
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